नषे में दौड़ने से पहले ही हाँफ जाओगे

उन्तिश्ठत् जागृत। जीवन जागने का चैतन्य होने का, उँचा उठने का, उठ कर चलने का, अग्नि की लौ की तरह, उँचा उठ ब्रहम को पाने का ‘स्व’ को ‘स्व’ की षक्तियों को जानने का नाम है। भोर हो गई है।

श्री ‘माँ’

माँ मेरे लिए एक तीर्थ थी उनके सानिध्य में एक सकून एक शान्ति, एक चैन की अनुभूति होती थी अंतिम दिनों मंे, भी (दया धर्म का मूल) है। दोहा और अजब हैरान हँू भगवान तुझे कैसे रिझाऊँ मैं। जैसे भजन

आभार ‘माँ’

वो मेरी माँ थी। वो देवलोक से आई थी ईश्वर के आकाश की एक श्वास बन के आई थी एक असाधारण व्यक्तित्व वह शक्ति का एक रूप बन कर आई थी वो मेरी माँ थी, जो भी हूँ उनकी बदौलत

कौशल का विकास – देश का विकास

कौशल का विकास – देष का विकासकौशल का विकास – देष का विकास लेखिका-  शोभा  चाँदला मधुमक्खी  का  छत्ता  शहद  से भरा  है,  यदि  शहद  निकालते  समय  सारी  मधुमक्खियाँ  शहद  निकालनेवाले पर चिपक जाती हैं, तो इसका अर्थ यह है